पड़ताल/आरा :– आरा की जनता इन दिनों जमीन की रजिस्ट्री और म्यूटेशन करवाने के लिए काफी परेशान है। कई लोगों का कहना है कि जो आरा अंचलाधिकारी पल्लवी गुप्ता बिना घूस लिए कोई काम नहीं करतीं। घूस की रकम भी लाखों की होती है।
2024–2025 में आरा की अंचलाधिकारी पल्लवी गुप्ता ने भारत सरकार की जमीन केसर–ए–हिंद का ही म्यूटेशन ।
जबकि केसर-ए -हिंद की जमीन ना बेचने का प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 294A में साफ–साफ उल्लेखित है कि केसर-ए-हिन्द जमीन” का अर्थ है भारत सरकार की संपत्ति, जिसे पहले ब्रिटिश सरकार के अधीन माना जाता था, और अब केंद्र सरकार की संपत्ति है और इसकी बिक्री या बंदोबस्ती पर पूर्णरूप प्रतिबंध है।
इसके वावजूद भी आरा की CO पल्लवी गुप्ता ने आरा की केसर ए हिंद की जमीन की मापी करवा कर उसका म्यूटेशन कर दीं हैं। जबकि सरकार की जमीन की हिफाज़त करना इनकी भी जिम्मेदारी है।

आरा, खाता संख्या–647, खेसरा संख्या–3793 का उल्लेख बिहार सरकार राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा केसर– ए– हिंद बताया गया है।
इस जमीन को आरा अंचलाधिकारी पल्लवी गुप्ता ने आधे दर्जन से अधिक लोगों का म्यूटेशन अवैध रुप से किया है। इतना ही नहीं आरा के पूर्व कई CO ने भी केसर– ए–हिंद जमीन के कई हिस्सों का दाख़िल ख़ारिज किया है।

मिली जानकारी के अनुसार 2024 से 25 के बीच में क़रीब–करीब 250 से अधिक लोगों का म्यूटेशन पेंडिग में पड़ा हुआ है और सामान्य कारणों की वजह से म्यूटेशन रिजेक्शन है लेकिन अवैध रुप से सरकार की जमीन मोटे रकम पर धड़ाधड़ म्यूटेशन हो रही है।
आइए जानते हैं इस मामले में क्या कहता है संविधान का अनुच्छेद 294
- संविधान के अनुच्छेद 294 (ए) के अनुसार जो संपति संविधान के लागू होने क पहले Dominion of India के लिए हिज मैजेस्टी में निहित थी और केसर ए हिन्द के रूप में दर्ज की जाती थी, संविधान लागू होने के पश्चात् दखल एवं उपयोग के आधार पर केन्द्र तथा राज्य सरकार की संपति मानी जायेगी। अर्थात् अगर कोई केसर ए हिन्द जमीन संविधान लागू होने के तुरंत पहले केन्द्र सरकार के दखल एवं उपयोग में थी, तो वह केन्द्र सरकार की और अन्य वैसी सारी जमीन राज्य सरकार की होगी।
- भूतपूर्व जमींदारों द्वारा आजादी के पूर्व केसर हिन्द भूमि की बंदोबस्ती की मान्यता नहीं की जानी चाहिए, क्योंकि कोई भी व्यक्ति अपना ही हक हस्तांतरित कर सकता है। जब केसर ए हिन्द जमीन का स्वामित्व भूतपूर्व जमींदार को प्राप्त नहीं था, तब उसकी बंदोबस्ती करना अवैध कार्रवाई की श्रेणी में आयेगा और इस आधार पर उनके द्वारा की गई बंदोबस्ती अवैध (void) माना जायेगा।
- भूतपूर्व जमीन्दारों द्वारा अगर केसर हिन्द भूमि का बंदोबस्ती एवं बिक्री की गई है तो इस मामले में सक्षम न्यायालय में मुकदमा दर्जकर बंदोबस्ती अथवा विक्री को रद्द कर दी जाय, तद्नुसार इसे सरकार के स्वामित्व में ले लिया जाय।
सवाल ये ?
भोजपुर जिला प्रशासन और जिला पदाधिकारी पर भी सवाल उठता है कि वो इस मामले पर संज्ञान क्यों नहीं लेते ? क्या इसमें उनकी भी मिली भगत है? इस मामले की उचित जांच होनी चाहिए और भ्रष्टाचारियों पर जल्द ही संज्ञान लेना चाहिए।